अनियमित नींद: हृदय रोग से मधुमेह तक – जानिए कैसे प्रभावित होती है सेहत
"अनियमित नींद हृदय रोग, मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है। नियमित और गुणवत्ता वाली नींद है स्वस्थ जीवन की कुंजी।"
आज की 24 घंटे की जीवनशैली में नींद अब negotiable यानी समझौते योग्य बन गई है। देर रात तक मोबाइल ब्राउज़िंग, अनियमित कार्य समय या लगातार टीवी शो देखना शुरुआत में तो मामूली लगता है, लेकिन लंबे समय तक ये आदतें धीरे-धीरे वैश्विक स्वास्थ्य संकट का आधार बन रही हैं।
शरीर और आंतरिक घड़ी
मानव शरीर सर्केडियन रिद्म यानी आंतरिक घड़ी पर चलता है, जो हार्मोन, मेटाबॉलिज़्म और अंगों के कामकाज को नियंत्रित करती है। अनियमित नींद से यह संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हाइपरटेंशन, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज़ और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
हृदय स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
अनियमित नींद से कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, रक्तचाप उच्च होता है और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता कम होती है। अमेरिकी हृदय एसोसिएशन अब नींद को हृदय स्वास्थ्य के लिए आहार और व्यायाम के बराबर महत्व देती है। अनियमित नींद हृदयाघात और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती है।
मेटाबॉलिक विकार और मधुमेह
नींद का ग्लूकोज नियंत्रण में अहम योगदान है। प्रतिदिन 6 घंटे से कम नींद या बदलती नींद की आदत इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बन सकती है, जो टाइप 2 डायबिटीज़ के लिए शुरुआती संकेत है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
नींद की कमी मस्तिष्क को प्रभावित करती है। अनियमित नींद सेरोटोनिन और डोपामाइन संतुलन को बिगाड़ती है, जिससे चिंता, अवसाद और मूड स्विंग्स बढ़ते हैं।
बेहतर नींद के लिए छोटे कदम
हर दिन सोने और जागने का समय नियमित रखें।
सोने से कम से कम 1 घंटा पहले कैफीन, भारी भोजन और स्क्रीन टाइम से बचें।
ध्यान, गहरी साँस या हल्की व्यायाम तकनीक अपनाएं।
शिफ्ट वर्कर्स के लिए लाइट थेरेपी, रणनीतिक झपकी और सचेत भोजन सहायक हो सकते हैं।
अनियमित नींद केवल थकान का कारण नहीं, बल्कि दीर्घकालिक हृदय, मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बीज है। नियमित और गुणवत्ता वाली नींद अब लक्ज़री नहीं, बल्कि रोकथाम स्वास्थ्य का आधार होनी चाहिए।